ज़माने भर से मिलने की जिद में, रह गया मै,
भीतर जो शख्स था उसे जान ही नहीं पाया |
यूँ तो तार्रुफ़ रहा मेरा दुनिया की हर शै से,
बस एक खुद को ही कभी, पहचान नहीं पाया |
-विशाल....
भीतर जो शख्स था उसे जान ही नहीं पाया |
यूँ तो तार्रुफ़ रहा मेरा दुनिया की हर शै से,
बस एक खुद को ही कभी, पहचान नहीं पाया |
-विशाल....
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