इरादे-कोहशिकन हैं तो क्यों कोई शिकवा करें तकदीर से,
गर चाह ले इंसान तो क्या मुमकिन नहीं है तदबीर से |
(इरादे-कोहशिकन--पर्वत को तोड़ने वाला इरादा या संकल्प
तदबीर---मेहनत, कोशिश)
-विशाल
गर चाह ले इंसान तो क्या मुमकिन नहीं है तदबीर से |
(इरादे-कोहशिकन--पर्वत को तोड़ने वाला इरादा या संकल्प
तदबीर---मेहनत, कोशिश)
-विशाल
No comments:
Post a Comment