ज़ख्म खा कर भी उसे दुआ दी मैंने
कुछ ऐसे ही ज़िन्दगी बिता दी मैंने
मै ही था मुंसिफ खुद पर इल्जामो का,
खुद को हर बार इसीलिए सज़ा दी मैंने....
-विशाल...
कुछ ऐसे ही ज़िन्दगी बिता दी मैंने
मै ही था मुंसिफ खुद पर इल्जामो का,
खुद को हर बार इसीलिए सज़ा दी मैंने....
-विशाल...
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