शहर के बाशिन्दों ने अब तलक गाँव नहीं देखे,
मुझे बद्दुआ देने वाले तूने मेरे घाव नहीं देखे |
लक्ष्मण ने कभी चेहरा नहीं देखा था सीता का,
और अब के देवरों ने कभी पाँव नहीं देखे |
मैं दुश्मनों से बचने में लगा रह गया उम्र भर,
कभी दोस्तों के छल कपट और दाँव नहीं देखे |
-विशाल
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