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पहले मुझे तारा कहता है और फिर ही मेरे टूट जाने की दुआ करता है,
यहाँ कौन अपना कह के मार दे खंजर, दिल इसी बात से तो डरता है |
-विशाल
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पहले मुझे तारा कहता है और फिर ही मेरे टूट जाने की दुआ करता है,
यहाँ कौन अपना कह के मार दे खंजर, दिल इसी बात से तो डरता है |
-विशाल
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