कई बार मुझे खुद को बदलना पड़ा है
ना चाहते हुए भी सबके लिए चलना पड़ा है
लोग ज़ख्म-दर-ज़ख्म देते रहे सदा,
मुझे अपने ही ज़ख्मों पे नमक मलना पड़ा है...
-विशाल...
ना चाहते हुए भी सबके लिए चलना पड़ा है
लोग ज़ख्म-दर-ज़ख्म देते रहे सदा,
मुझे अपने ही ज़ख्मों पे नमक मलना पड़ा है...
-विशाल...
kya baat hai....aap hamesha dusron ke baare mein hi sochte hain....aaj kal aise log kahan milte hain....
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