अजीब लोग हैं क्या मुंसिफी की है
हमारे क़त्ल को कहते हैं कि खुदखुशी की है,
हम तो टूट गए अन्दर आईने की तरह,
वो हँस कर कहते हैं बस दिल्लगी की है...
-विशाल...
हमारे क़त्ल को कहते हैं कि खुदखुशी की है,
हम तो टूट गए अन्दर आईने की तरह,
वो हँस कर कहते हैं बस दिल्लगी की है...
-विशाल...
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