मैंने वफाओं की उम्मीद रखना छोड़ दिया है,
जबसे खुद पानी ने सुराही को फोड़ दिया है,
मै अब तक भटक रहा हूँ बीहड़ों में कहीं,
उसने मेरे रास्तों को, कुछ यूँ मोड़ दिया है....
-विशाल...
जबसे खुद पानी ने सुराही को फोड़ दिया है,
मै अब तक भटक रहा हूँ बीहड़ों में कहीं,
उसने मेरे रास्तों को, कुछ यूँ मोड़ दिया है....
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