चिराग.......
Friday, 27 July 2012
माना तेरे मुक़द्दर में कांटे ही कांटे हैं, पर ये दिन भी गुजर जायेंगे, तू इस तरह से गम ना कर
ये कुदरत किसी एक की नहीं, तुझ पर भी मेहरबाँ होगी, तेरा भी दामन फूलों से जाएगा भर|
------------------------------------विशाल
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment