Saturday, 28 July 2012


जाने क्या ढूंढती रहती हैं हरदम आँखे उसकी,
कुछ ना कुछ यक़ीनन उसने खोया तो होगा |
नाम आँखों से लिखा था जो आखिरी ख़त उसको,
पढ़ते हुए अश्कों से उसने भिगोया तो होगा |
खुली पलकों से ख्वाब देखना सब के वश की बात नहीं,
जाहिर है कि वो रात भर सोया तो होगा |
यूँ तो मेरी मौत का ख्वाहिशमंद रहा है वो,
पर दिखावे के लिए ही सही, वो रोया तो होगा |
वही पाते हैं हम जो हमने कभी दिया होता है,
जो काट रहा है, कभी उसने ही बोया तो होगा |
उसी के दम से रोशन है ये बुझता हुआ 'चिराग',
सूखी बाती को उसने कभी तेल में डुबोया तो होगा |
-------------------विशाल


No comments:

Post a Comment