लोग आज सब के सब घबराने लगे हैं,
अब तो अपने ही हमको आजमाने लगे हैं|
कभी बाप की त्योरी भी बेटे को डराती थी,
अब बेटे ही बाप को आँखें दिखाने लगे हैं|
हम वक़्त की रफ़्तार के साथ बहते रहे हैं,
पता ही नहीं कहाँ आ के ठिकाने लगे हैं|
मुजरिमों की हिमाकत तो देखिये जरा,
मुन्सिफों को ही आँखें दिखाने लगे हैं|
मेरी मौत का बेसब्री से इन्तजार है उन्हें,
देखिये ना अभी से फातिहा गाने लगे हैं|
नए दौर में नए रिश्ते बनाने की होड़ में,
रिश्ते खून के सब के सब धुंधलाने लगे हैं|
-----------------विशाल
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