हर बार की तरह रिश्तों की दुहाई देगा,
वो फिर मुझे किसी चौराहे पे ला ही देगा|पत्थर के शहर में हैं पत्थर के ही हैं लोग,
यहाँ किसी को भला क्या सुनाई देगा|
बिक जाते हैं जहाँ सब ईमान औ धर्म,
वहां मेरे हक में है कौन जो गवाही देगा|
अब तो रीता ही रखा है उसने मुझको,
अब जब देगा तो सीधे रिहाई ही देगा|
जीवन में तो अंधेरों ने पीछा नहीं छोड़ा,
कब्र पर तो 'चिराग' कोई जला ही देगा|
-------------विशाल
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