मैं हूँ भी या नहीं, पता ही नहीं मुझे,
पर अभी भी मेरी दास्तान बाकी है |
सब तो छीन लिया दुनिया ने मुझसे,
बस जमीन और आसमान बाकी है |
कैसे छोड़ दूँ अभी इस लड़ाई को मैं,
बरी हुआ हूँ पर इल्जाम बाकी है|
और तो कुछ भी नहीं तेरा पास मेरे,
हाँ, उन लबों का निशान बाकी है |
उनकी गवाहियाँ कसूरवार ठहरा दे मुझे तो क्या ,
मेरे दिल का तो बयान बाकी है |
मैं ना रहा तो भी दुनिया चलती रहेगी,
तेरे लिए अभी पूरा जहान बाकी है|
-------------विशाल
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